सोमवार, 5 सितंबर 2016

CM ने गोपालगंज को नजरअंदाज कर दिया।

गोपालगंज:बढ़ती पीढ़ी को नजरअंदाज न करके देखा जाये तो गोपालगंज जिला राजनीती का बहोत बड़ा अड्डा हो चूका है और उसका कारण बडे से बडे घटनाओ का
सफल होना,घटनाये होने के बाद सरकार की आलोचनाएं तेजी से बड़ जाती है तथा सोसल मिडिया का प्रयोग कर पछ-बिपछ आपस में आरोप-प्रत्यारोप करना चालू कर देते है।
अभी कुछ दिन पहले की बात है गोपालगंज जिले में जहरीली शराब का शेवन कर लगभग 21 लोगो की मौत हो गयी।यह मामला सामने आने पर राजनीती पारा में काफी बढ़त हुयी तथा सोसल मिडिया पर एक के बाद एक पोस्ट,साझा,टीप्पणी होने लगी।
अगर हम सोसल मिडिया को नजरअंदाज कर बात करे तो यह मामला जिला प्रशासन की पोल खोल रही है।बिहार सरकार अप्रैल २०१६ को शराब व्यवसाय के साथ साथ शराब शेवन पर भी प्रतिवंध लागु कर दी,जबकी शराब प्रतिबन्ध को ६ माह होने को है।
अगर देखा जाये तो गोपालगंज जिला प्रशासन को ६ माह मिला शराब पर काबू पाने को,पर फिर भी प्रशासन नाकाम रही।जबकि यह भी सत्य है लगभग ६ माह के अंदर जिला प्रशासन के किसी बड़े अधिकारियो का तबादला भी नही हुआ उसके बावजूद भी जिला प्रशासन इतनी बडी बारदात को रोक न सकी।इस मामले में नगर प्रभारी सभी 25 पुलिशकर्मियो को निलम्बित कर दिया गया तथा लगभग 14 लोगो को नामजद भी किया गया।यैसे में यह बड़ा सवाल है कि राज्य के CM या मंत्री ने जिले के बड़े अधिकारियो से जवाब क्यों नही माँगा? या कोई ठोस करवाई क्यों नही की?,क्या गोपालगंज जिला CM के नजरो में नही है?यैसी बड़ी घटनाये होना एक असफल अधिकारी की पहचान है।यह मामला सामने आने के बाद सुनने को मिला शराब बंदी लागु होने के बाद जिले में 667 छापेमारी की गयी उसके बावजूद भी नगर थाने के एक किलोमीटर समीप यह घटना हो गयी तथा कड़वा सच यह है की सरकार ने जिले के उच्चधिकारियों पर तथा उत्पाद विभाग पर कोई करवाई नही किया।एक तरह से देखा जाये तो CM ने गोपालगंज को नजरअंदाज कर दिया।

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